शारदीय नवरात्र बुधवार से शुरू हो रहा है. इसकी तैयारी पूरी कर ली गयी
है. बुधवार को प्रात: स्नान ध्यान के बाद कलश स्थापना के साथ मां की
पूजा-अर्चना शुरू हो जायेगी. कई घरों व मंदिरों में कलश की स्थापना की
जायेगी. बुधवार को प्रतिपदा प्रातः 7: 56 बजे तक ही है.
हालांकि उदया तिथि में प्रतिपदा मिलने के कारण पूरे दिन यह तिथि मान्य
होगी. इस दिन अभिजीत मुहूर्त दिन के 11: 37 बजे से 12: 23 बजे तक है. यह
भी कलश स्थापना के लिए उपयुक्त समय है. वाराणसी पंचांग के अनुसार, सुबह
7.56 बजे के बाद से द्वितीया लग जायेगा. इसलिए प्रतिपदा युक्त द्वितीया में भी कलश की स्थापना की जा सकती है.
वाराणसी व मिथिला पंचांग के अनुसार, मां का आगमन नाव पर और गमन हाथी
पर हो रहा है. आगमन और प्रस्थान दोनों शुभ माना गया है. मिथिला पंचांग के
अनुसार, प्रतिपदा सुबह 8.06 बजे तक है. 15 अक्तूबर को षष्ठी है. इस दिन
बेलवरण के बाद अधिकतर पंडालों के पट खुल जायेंगे. 16 को महासप्तमी है. इस
दिन नवपत्रिका प्रवेश के साथ मां की प्रतिमा की आराधना शुरू हो जायेगी. 19 को विजया दशमी है.
रांची : सैनिक सम्मान के साथ डोरंडा स्थित जैप वन देवी मंडप में
बुधवार को कलश की स्थापना की जायेगी. पूजा प्रात: सात बजे शुरू हो जायेगी.
दिन के 10.10 बजे घट की स्थापना होगी. इसके बाद बीजारोपण व ध्वजारोहण किया
जायेगा. इसी समय सलामी दी जायेगी व बैंड बजाया जायेगा. इस बार 65 भक्त अखंड
दीप जलायेंगे अौर पूजा-अर्चना में बैठेंगे. वहीं पांच सरकारी अखंड दीप
जलाये जायेंगे. इस बार 45 किलो जौ, 10 किलो गेंहू, डेढ़ किलो तिल, डेढ़
किलो मकई, एक किलो धान व एक किलो चना बोआ जायेगा.
इसके बाद पंडित सहदेव उपाध्याय दुर्गा सप्तशती का पाठ करेंगे. लगभग
डेढ़ बजे आरती के साथ पूजा का समापन होगा. वहीं शाम में छह से रात साढ़े आठ
बजे तक मध्यांतर पूजा होगी. 16 को नवपत्रिका प्रवेश होगा अौर इसी दिन
फूलपाती यात्रा दिन के साढ़े दस बजे निकाली जायेगी. 18 को अस्त्र-शस्त्र पूजन होगा. 19 को अपराजिता पूजा दिन के साढ़े नौ बजे से होगी. 21 को
विसर्जन शोभा यात्रा दिन के 2.20 बजे निकाली जायेगी.
प्राचीन श्री राम मंदिर में रामायण पाठ आज से
रांची : कलश स्थापना के साथ बुधवार को प्राचीन श्री राम मंदिर चुटिया
में 351 कुंवारी कन्याओं द्वारा महंत सनातन दास के सान्निध्य में ऐतिहासिक
सस्वर रामायण पाठ व नव दुर्गा पूजन आरंभ होगा. इस मौके पर कलश की स्थापना
भी होगी. महंत सनातन दास व्यास जी 14 वर्षों से अधिक समय से राम चरित्र
मानस का सस्वर पाठ कराते आ रहे हैं. मंहत सियाराम दास के शिष्य महंत सनातन
दास ने बनारस व वृंदावन में वर्षों इसकी शिक्षा हासिल की है. यह
कार्यक्रम 10 दिनों तक चलेगा. प्रवचन व राम कथा करने के लिए विशेष रूप से
अयोध्या से आराधना शाश्वत जी आयी हैं.
आयोजन को सफल बनाने में सुरेश साहू, मनपूरण नायक, पद्मश्री मुकुंद नायक, लखन महतो, छत्रधारी महतो, रवि सिंह, कृष्णा साहू, सतीश पांडे, गुजा
तिर्की, धंजू नायक, विजय बड़ाईक, रानू चौबे, बाबू लाल ठाकुर, कैलाश केसरी,
मीकू महतो, पप्पू ठाकुर, रोहित ठाकुर, मंजू चौधरी, आभा सिन्हा, ललित महतो,
शंकर महतो ,अनिल महतो, अजीत केसरी, अनुपम सोनी, अमन श्रीवास्तव ,डी सी
महतो, राजकुमार विश्वकर्मा आदि लगे हैं.
अर्थात एकमात्र सत्य वस्तु श्रीराम ही बहुरूपिणी माया को स्वीकार कर विश्वरूप में भासित हो रहे हैं और श्रीसीताजी ही वह योगमाया हैं. श्रीरामचरितमानस में सीताजी को शक्ति का मूल स्रोत माना गया है. वे
पराशक्ति परमेश्वरी हैं. उनके लीला- कटाक्ष से जगत का निर्माण, पालन और
संहार होता है. उन परम चिदात्मिका शक्ति की वंदना गोस्वामी तुलसी दासजी
मूलतः तीन रूपों में करते हैं- उद्भवकारिणी, स्थितिकारिणी और संहारकारिणी :
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