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Showing posts from April, 2019

दाने-दाने के लिए किया मोहताज

वो कहते हैं, "अगर सुरक्षा इतनी मज़ बूत है तो मेरे चुनाव अभियान का समर्थन इतने जवान क्यों कर रहे हैं. 997 जवानों ने आत्महत्या की है. ये बताते नहीं है. 775 जवान शहीद हो गए हैं. हमारे पास आंकड़े हैं. आए दिन पाकिस्तान सर पर चढ़कर बोलता है लेकिन ये जनाब चुनाव के समय बोलते हैं." तेज बहादुर अपने वीडियो के ज़रिए ही चर्चा में आए थे. उन्होंने जवानों को मिलने वाले खाने की गुणवत्ता का सवाल उठाया था. वीडियो क्यों शेयर किया इस सवाल पर वो कहते हैं, "वो एक विश्वास था. सिर्फ़ मुझे ही नहीं बल्कि सभी देशवासियों को. हमें लगता था कि देश को एक अच्छा प्रधानमंत्री मिला है. वो बार-बार जनता से अपील करते थे कि आप मेरा सहयोग करो. नोटबंदी के दौरान गोवा में एक बड़ी रैली में उन्हें छाती पीटकर अपील की थी कि मेरा सहयोग करो. कहा था कि ना खाऊंगा ना खाने दूंगा. हर भारतीय मेरी मदद करे. तो एक नागरिक के नाते हमें लगा कि देश का प्रधानमंत्री इतना काम कर रहा है, हमें भी अ पनी बात रखनी चाहिए. उस विश्वास में ही मैंने अपनी बात रखी थी. लेकिन मिला क्या? बर्खास्त कर दिया ग या. मेरा परिवार दाने-दाने के ल...

‘हेमा मालिनी की फ़ोटो हमारी मेहनत के साथ मज़ाक़ है.’

राजेंद्री देवी अपनी छोटी-छोटी पोतियों के साथ गेहूं की फ़सल काट रही हैं. उनका पूरा बदन पसीने से तर बतर है. गेहूं की कटाई को खेती का सबसे मुश्किल काम माना जाता है. एक तो गर्म मौसम और उस पर हांड़-तोड़ मेहनत. यही वजह है कि ज़मींदार किसान गेहूं अपने हाथ से काटने के बजाए राजेंद् री देवी जैसी भूमिहीन मज़दूरों से कटवाते हैं. राजेंद्री देवी तीन बीघा गेहूं का खेत काट रही हैं. उनके प ति के अलावा उनकी छोटी-छोटी नौ पोतियां भी इस काम में लगी हैं. इस खेत को काटने में उन्हें हफ़्ते भर का समय लग स कता है और इसके बदले में उन्हें तीन मन यानी 120 किलो गेहूं मिलेगा. राजेंद्री देवी कहती हैं, "हम यहां मज़ दूरी करते हैं. खेत-खेत जाकर गेहूं काटते हैं. तीन बीघा काटने के तीन मन गेहूं मिलेंगे." वो कहती हैं, "दो सौ-ढाई सौ रुपये रोज़ भी मज़दूरी नहीं बैठती है. क्या होता है इतने पैसों में? एक किलो तेल नहीं मिल पाता है. ये बहुत कठिन काम है और कभी-कभी तो मज़दूरी भी खा जाते हैं. मेहनत करवाकर भगा देते हैं. हम रोते चले आते हैं जंगल से." राजेंद्री देवी भूमिहीन मज़दूर हैं. छह साल पहले उ न...