वो कहते हैं, "अगर सुरक्षा इतनी मज़बूत है तो मेरे चुनाव अभियान का समर्थन इतने जवान क्यों कर रहे हैं. 997 जवानों ने आत्महत्या की है. ये
बताते नहीं है. 775 जवान शहीद हो गए हैं. हमारे पास आंकड़े हैं. आए दिन
पाकिस्तान सर पर चढ़कर बोलता है लेकिन ये जनाब चुनाव के समय बोलते हैं."
तेज बहादुर अपने वीडियो के ज़रिए ही चर्चा में आए थे. उन्होंने जवानों को मिलने वाले खाने की गुणवत्ता का सवाल उठाया था.
वीडियो क्यों शेयर किया इस सवाल पर वो कहते हैं, "वो एक विश्वास था. सिर्फ़ मुझे ही नहीं बल्कि सभी देशवासियों को. हमें लगता था कि देश को एक अच्छा प्रधानमंत्री मिला है. वो बार-बार जनता से अपील करते थे कि आप मेरा सहयोग करो. नोटबंदी के दौरान गोवा में एक बड़ी रैली में उन्हें छाती पीटकर अपील की थी कि मेरा सहयोग करो. कहा था कि ना खाऊंगा ना खाने दूंगा. हर भारतीय मेरी मदद करे. तो एक नागरिक के नाते हमें लगा कि देश का प्रधानमंत्री इतना काम कर रहा है, हमें भी अपनी बात रखनी चाहिए. उस विश्वास में ही मैंने अपनी बात रखी थी. लेकिन मिला क्या? बर्खास्त कर दिया गया. मेरा परिवार दाने-दाने के लिए मोहताज हो गया. जनवरी में मेरा बेटा भी दुनिया छोड़ कर चला गया."
तेज बहादुर पर सेना के अनुशासन तोड़ने के आरोप थे और उन्हें इसी के तहत बर्खास्त किया गया था.
वो कहते हैं, "मैं मानता हूं मैंने अनुशासन तोड़ा. लेकिन मेरा जो अपना फ़ंड है, वो तो मुझे दो. 21 साल जो मैंने नौकरी की, उसकी पेंशन तो दो. अगर वो भी नहीं देते हैं तो जो भ्रष्टाचारी अधिकारी हैं उन्हें तो दंडित करो. लेकिन उन्होंने ये भी नहीं किया. जो भ्रष्टाचार की आवाज़ उठा रहा है उसे ख़त्म कर दो और जो भ्रष्टाचारी हैं उन्हें संरक्षण दो. यही इनकी नीति है."
कांग्रेस ने इस नोटिस को मुद्दों से ध्यान भटकाने की प्रधानमंत्री मोदी की कोशिश बताया है. पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी ने इसे 'बकवास' क़रार दिया है.
मगर गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि ये एक सामान्य प्रक्रिया है और जब भी कोई सांसद किसी मंत्रालय से शिकायत करता है तो उसपर कार्रवाई की जाती है.
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी है. पत्रकारों के सवाल पर उन्होंने कहा, "पूरे हिंदुस्तान को मालूम है कि राहुल गांधी हिंदुस्तानी हैं. उनके सामने पैदा हुआ, उनके सामने उसकी परवरिश हुई, उनके सामने बड़ा हुआ. सबको मालूम है ये. क्या बकवास है ये."
लेकिन 2015 में इसी मामले पर सुप्रीम कोर्ट याचिका को ख़ारिज़ कर चुका है. इसके बाद भी चार साल बाद गृह मंत्रालय की ओर से नोटिस भेजा गया है.
इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में एक अर्ज़ी लगाई गई थी कि शीर्ष कोर्ट सीबीआई को राहुल गांधी के ख़िलाफ़ केस दर्ज करने का आदेश दे.
लेकिन 30 नवंबर 2015 को जस्टिस एचएल दत्तू और जस्टिस अमिताव रॉय ने याचिका के साथ दिए गए दस्तावेज़ की प्रामाणिकता और उसे हासिल करने के तरीक़े पर सवाल उठाए थे.
अपनी शिकायत में सुब्रमण्यम स्वामी ने आरोप लगाया है कि राहुल गांधी ने ब्रिटेन में 2003 में रजिस्टर्ड एक कंपनी बैकऑप्स लिमिटेड के दस्तावेज़ों में अपनी नागरिकता ब्रिटिश बताई है और वो इस कंपनी के डायरेक्टर और सेक्रेटरी थे.
नोटिस में लिखा है कि सुब्रमण्यम स्वामी ने अपनी शिकायत में ये कहा है कि इस कंपनी के 2005 से 2006 तक के वार्षिक रिटर्न में उन्होंने अपनी नागरिकता ब्रिटिश लिखी है.
गृह मंत्रालय ने अब मंगलवार को राहुल गांधी को नोटिस कर इस बारे में 'तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट करने के लिए' कहा है.
नोटिस का जवाब देने के लिए राहुल गांधी को 15 दिनों का वक़्त दिया गया है.
अपने पार्टी नेता की नागरिकता पर सवाल को ख़ारिज करते हुए कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि सारी दुनिया को पता है कि राहुल गांधी भारतीय नागरिक हैं.
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी के पास बेरोज़गारी, खेती की दुर्दशा और काले धन के मुद्दे पर कोई जवाब नहीं है और महज़ ध्यान भटकाने के इरादे से वो सरकारी नोटिस के ज़रिए कहानी बुन रहे हैं.
तेज बहादुर अपने वीडियो के ज़रिए ही चर्चा में आए थे. उन्होंने जवानों को मिलने वाले खाने की गुणवत्ता का सवाल उठाया था.
वीडियो क्यों शेयर किया इस सवाल पर वो कहते हैं, "वो एक विश्वास था. सिर्फ़ मुझे ही नहीं बल्कि सभी देशवासियों को. हमें लगता था कि देश को एक अच्छा प्रधानमंत्री मिला है. वो बार-बार जनता से अपील करते थे कि आप मेरा सहयोग करो. नोटबंदी के दौरान गोवा में एक बड़ी रैली में उन्हें छाती पीटकर अपील की थी कि मेरा सहयोग करो. कहा था कि ना खाऊंगा ना खाने दूंगा. हर भारतीय मेरी मदद करे. तो एक नागरिक के नाते हमें लगा कि देश का प्रधानमंत्री इतना काम कर रहा है, हमें भी अपनी बात रखनी चाहिए. उस विश्वास में ही मैंने अपनी बात रखी थी. लेकिन मिला क्या? बर्खास्त कर दिया गया. मेरा परिवार दाने-दाने के लिए मोहताज हो गया. जनवरी में मेरा बेटा भी दुनिया छोड़ कर चला गया."
तेज बहादुर पर सेना के अनुशासन तोड़ने के आरोप थे और उन्हें इसी के तहत बर्खास्त किया गया था.
वो कहते हैं, "मैं मानता हूं मैंने अनुशासन तोड़ा. लेकिन मेरा जो अपना फ़ंड है, वो तो मुझे दो. 21 साल जो मैंने नौकरी की, उसकी पेंशन तो दो. अगर वो भी नहीं देते हैं तो जो भ्रष्टाचारी अधिकारी हैं उन्हें तो दंडित करो. लेकिन उन्होंने ये भी नहीं किया. जो भ्रष्टाचार की आवाज़ उठा रहा है उसे ख़त्म कर दो और जो भ्रष्टाचारी हैं उन्हें संरक्षण दो. यही इनकी नीति है."
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कांग्रेस
अध्यक्ष राहुल गांधी से उनकी नागरिकता को लेकर की गई शिकायत पर नोटिस भेजकर
स्थिति स्पष्ट करने के लिए कहा है.
बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने शिकायत की थी कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने 2009 में ख़ुद को ब्रिटेन का नागरिक बताया था.कांग्रेस ने इस नोटिस को मुद्दों से ध्यान भटकाने की प्रधानमंत्री मोदी की कोशिश बताया है. पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी ने इसे 'बकवास' क़रार दिया है.
मगर गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि ये एक सामान्य प्रक्रिया है और जब भी कोई सांसद किसी मंत्रालय से शिकायत करता है तो उसपर कार्रवाई की जाती है.
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी है. पत्रकारों के सवाल पर उन्होंने कहा, "पूरे हिंदुस्तान को मालूम है कि राहुल गांधी हिंदुस्तानी हैं. उनके सामने पैदा हुआ, उनके सामने उसकी परवरिश हुई, उनके सामने बड़ा हुआ. सबको मालूम है ये. क्या बकवास है ये."
लेकिन 2015 में इसी मामले पर सुप्रीम कोर्ट याचिका को ख़ारिज़ कर चुका है. इसके बाद भी चार साल बाद गृह मंत्रालय की ओर से नोटिस भेजा गया है.
इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में एक अर्ज़ी लगाई गई थी कि शीर्ष कोर्ट सीबीआई को राहुल गांधी के ख़िलाफ़ केस दर्ज करने का आदेश दे.
लेकिन 30 नवंबर 2015 को जस्टिस एचएल दत्तू और जस्टिस अमिताव रॉय ने याचिका के साथ दिए गए दस्तावेज़ की प्रामाणिकता और उसे हासिल करने के तरीक़े पर सवाल उठाए थे.
अपनी शिकायत में सुब्रमण्यम स्वामी ने आरोप लगाया है कि राहुल गांधी ने ब्रिटेन में 2003 में रजिस्टर्ड एक कंपनी बैकऑप्स लिमिटेड के दस्तावेज़ों में अपनी नागरिकता ब्रिटिश बताई है और वो इस कंपनी के डायरेक्टर और सेक्रेटरी थे.
नोटिस में लिखा है कि सुब्रमण्यम स्वामी ने अपनी शिकायत में ये कहा है कि इस कंपनी के 2005 से 2006 तक के वार्षिक रिटर्न में उन्होंने अपनी नागरिकता ब्रिटिश लिखी है.
गृह मंत्रालय ने अब मंगलवार को राहुल गांधी को नोटिस कर इस बारे में 'तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट करने के लिए' कहा है.
नोटिस का जवाब देने के लिए राहुल गांधी को 15 दिनों का वक़्त दिया गया है.
अपने पार्टी नेता की नागरिकता पर सवाल को ख़ारिज करते हुए कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि सारी दुनिया को पता है कि राहुल गांधी भारतीय नागरिक हैं.
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी के पास बेरोज़गारी, खेती की दुर्दशा और काले धन के मुद्दे पर कोई जवाब नहीं है और महज़ ध्यान भटकाने के इरादे से वो सरकारी नोटिस के ज़रिए कहानी बुन रहे हैं.
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