एनसीसी यूनिफ़ॉर्म में अनामिका की तस्वीरें और अलमारी पर रखी तमाम ट्रॉफ़ियां सामने वाले तंग कमरे में पारिवारिक तस्वीरों के साथ नज़र
आती हैं. हैदराबाद में होने वाले कई इवेंट्स में अनामिका बतौर एनसीसी
वॉलंटियर हिस्सा लेती थीं.
अनामिका के माता-पिता शहर के आदिलाबाद इलाके में रहते हैं. उनके पिता गणेश आदिलाबाद में छोटा-मोटा बिजनेस करते हैं.
गणेश बताते हैं, "कोई जैसी बेटी मांग सकता है, उतनी ही बेस्ट बेटी थी अनामिका. मैं शारीरिक तौर पर विकलांग हूं. वह मुझसे कहा करती थी, पापा मैं आर्मी आफ़िसर बनकर आपकी देखभाल
करूंगी. वह शैतानियां भी करती थीं, जब छुट्टियों में घर आती थी तो पूरे घर के लोगों को अपने उछल-कूद से चिंता में डाले रखती थी."
ये सब बताते हुए गणेश मुस्कुराने की कोशिश करते हैं लेकिन इस कोशिश में उनका गला रुंधने लगते हैं.
उमा बताती हैं कि किस तरह से वो अपने पुराने स्कूल में बच्चों को फिजीकल ट्रेनिंग देने का काम करती थीं. उन्होंने बताया, "उसके टीचर उसे
बहुत पसंद करते थे. वे लोग भी उसकी मौत के बाद आए थे. अनामिका अपने कॉलेज
के बाद हर दूसरे दिन स्कूली बच्चों को थ्रो बॉल, कबड्डी और बास्केटबॉल की ट्रेनिंग देती थी."
उमा बताती हैं कि अनामिका उन्हें यंग लेडी कहा करती थीं.
उमा याद करती हैं, "अनामिका जल्दी ही दिल्ली जाने वाले थी. एनसीसी कैडेट के तौर पर रिपब्लिक डे परेड में हिस्सा लेने के लिए उसे ज़रूरी ट्रेनिंग लेनी
थी. उसे सेलेक्शन प्रोसेस के नतीजों का इंतज़ार था."
उमा अपनी पोती के बारे में बताती हैं, "वो काफी समझदार थीं. उसे चिकन फ्राइ बहुत पसंद था. लेकिन जब हमारे पास पैसे नहीं होते तब
वो सब्जियां भी खा लेती थीं. शिन चेन और डोरेमोन उसके पसंदीदा कार्टून
कैरेक्टर थे और वो उनके आवाजों की नकल भी उतार लेती थी."
उमा
कुछ साल पहले पड़ोस में हुए एक हादसे को भी याद करती हैं, "पड़ोस की एक बच्ची ने पिता के डांटने पर आत्महत्या कर ली थी. अनामिका को लगता था कि लड़की को ऐसा नहीं करना चाहिए था, वह भी केवल इस बात के लिए किसी ने उसे
डांट दिया हो."
उस मनहूस दिन अनामिका की दादी के घर में कई मेहमान आए हुए थे. अनामिका गली में ही मौजूद अपनी चाची के घर गई थीं.
दादी
उमा बताती हैं, "मुझे नहीं मालूम था कि उसके रिजल्ट आ गए. मुझे लगा कि यहां जगह कम है तो वो वहां सोने गई है. मैं शाम में उसे चाय पीने के लिए बुलाने गई, उसने कहा कुछ मिनट में आ रही हूं लेकिन वो नहीं आई."
नम आंखें लेकिन चेहरे पर मुस्कान के साथ वेंकटेश बताते हैं कि उन्होंने वेन्नेला को सिखाया था कि मोटरसाइकिल कैसे चलाई जाती है.
"मैंने उसे बेसिक बातें बताई थी और राइड के लिए ले गया था. एक सुबह, वो पापा की बाइक लेकर राइड के लिए निकल गई. मैं तब सो रहा
था. उसने मुझे राइड के बारे में बताया, मुझे यकीन नहीं हुआ तो मैंने उसे
फिर से राइड पर चलने को कहा, वो मुझे राइड पर ले गई."
"वह
एकदम आराम से बाइक चला रही थी, ये देखकर मुझे बेहद खुशी हुई. हालांकि कई बार बिना उसे बताए, उसकी सुरक्षा के लिए मैं उसके पीछे-पीछे चलता था. वो
हमारे गांव के खेतों में बने पतले रास्तों पर भी बाइक चला लेती थी. एक बार तो वो अपने दोस्त की शादी में बाइक से जाना चाहती थी, मैंने पापा से उसे
अनुमति दिलवाई थी."
वेंकटेश, वेन्नेला से केवल एक साल बड़े हैं. वे पिछले साल कॉमर्स और सिविक्स (नागरिक शास्त्र) की परीक्षा पास नहीं कर पाए थे.
वे
बताते हैं, "मैं और मेरी बहन, इस साल की परीक्षा के लिए एक साथ तैयारी कर रहे थे. कई बार तो उसके कई साथी भी उससे विषयवस्तु को समझने के लिए आते थे.
वह मुश्किल कॉन्सेप्ट को याद करने के आसान ट्रिक सब बताती थी."
वेन्नेला अपनी ग्रैजुएशन की पढ़ाई पूरी करना चाहती थी.
निज़ामाबाद
की उपभोक्ता अदालत में अटेंडेंट के तौर पर काम करने वाले वेन्नेला के पिता टी गोपालकृष्ण बताते हैं, "जब भी मैं उसकी शादी की बात करता था, वो मुझे
झिड़कने लगती थी. कहती थी कि जीवन में बहुत कुछ है, शादी करने के अलावा. वो कहती थी कि डिग्री हासिल करने से सोसायटी में सम्मान मिलेगा. जब वेन्नेला
का जन्म हुआ था तबसे मैंने शराब पीनी छोड़ दी. मैं उसकी शादी के लिए पैसे
बचाने लगा था. लेकिन वह चाहती थी कि मैं उसकी पढ़ाई पर खर्च करूं."
वेंकटेश अपना पर्स खोलकर अपनी बहन की तस्वीर दिखाते हुए कहते हैं कि ये हमेशा उनके पास रहती है.
वेंकटेश कहते हैं, "हमारे झगड़े भी होते थे. कई बार उसके
मजाक से मैं चिढ़ जाता था. वो बाइक को लेकर मेरे से झगड़ती थी. जब कभी मैं
बाजार जाता था तो वह मुझे स्नैक्स लाने को कहती थी. पानी पूरी उसकी फेवरिट
थी. मुझे नहीं लगता कि अब कभी मैं पानी पूरी खाने जा पाऊंगा."
वेन्नेला की कजिन अमूल्या ने दसवीं की पढ़ाई पूरी की है. अमूल्या का जब रिजल्ट निकला तब वेन्नेला उनके साथ थीं.
उन्होंने
बताया, "अक्का ने इंटरमीडिएट में मुझे मैथ्स लेने की सलाह दी थी. उनका कहा था कि मेरी मैथ्स अच्छी है तो मैथ्स लेने से मेरा भविष्य बेहतर होगा. वो
जब भी हमारे यहां आती थीं, हमारे लिए फेवरिट डिश बनाती थीं. हमलोग साथ में
कॉमेडी शो देखते थे. अपने आस-पड़ोस के लोगों को हंसाने के लिए वो जोक्स सुनाती रहती थी."
जिस दिन वेन्नेला का रिजल्ट आया, वो दिन भी आम दिनों की तरह ही गुजरा था. शाम में पिता के मोबाइल फोन पर उन्होंने अपना रिजल्ट देखा. वेन्नेला की मां बताती हैं कि रिजल्ट देखने के बाद उसे
रिजल्ट पर यकीन नहीं हो रहा था.
वेन्नेला की मां याद करती
हैं, "वो लगातार कह रही थी कि फेल कैसे हो सकती हूं. हमने उसे समझाया कि
कोई बात नहीं है. तुम फिर से जांच के लिए अप्लाई कर दो और फिर से परीक्षा
दे देना. मैं रात का खाना बनाने किचन में गई. अगले ही मिनट में मैंने उसे वॉशरूम से रोते हुए निकलते देखा. वो बता रही थी कि चूहे मारने वाली दवा
उसने पी ली है. वो परीक्षा में फेल हो गई है, इसलिए उसे मर जाना चाहिए.
अस्पताल में भी वो लगातार कहती रही कि मुझे पास होना चाहिए था. उसे इस बात की चिंता ज्यादा हो रही थी कि वो उन विषयों में कैसे फेल हो गई, जिसमें वह
मजबूत थी."
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